History ka paper ( इतिहास का पर्चा)
एक कहावत तो आप सभी ने सुनी होगी " हिस्ट्री जियोग्राफी बड़ी बेवफ़ा रात को रटो सुबह सफा ।" बस ये कहावत मेरी ज़िन्दगी में सच हो गई और फिर क्या हुआ आयिए आप खुद ही देख लीजिए 👇👇 इतिहास परीक्षा थी उस दिन , चिन्ता से हृदय धड़कता था । थे बुरे शगुन घर से चलते ही , बांया हाथ फड़क्ता था । मैने सवाल जो याद किए , वे केवल आधे याद हुए । उनमें से भी कुछ स्कूल तलक , आते -आते बर्बाद हुए । तुम २० मिनट हो लेट , द्वार पर चपरासी ने बतलाया । मैं मेल ट्रेन की तरह दौड़ता , कमरे के भीतर आया । पर्चा हाथो में पकड़ लिया , आंख मूंद टूक झूम गया । ओ ! प्रश्न पत्र लिखने वाले , ये पर्चा है या एटम बोम ? तूने पूछे वे ही सवाल , जो - जो थे मैने रटे नहीं । फिर आंख मूंद कर बैठ गया , बोला भगवान दया कर दे मेरे दिमाग में इन प्रश्नों के , उत्तर ठूंस ठूंस भर दे । गीता कहती है कर्म करो , फल की चिन्ता मत किया करो । मन में आए जो बात उसी को पर्चे पर लिख दिया करो । मैने लिखा - पानी पत का दूसरा युद्ध हुआ था सावन में , जापान - जर्मनी बीच हुआ १८७५ में । लिख दिया महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी के चेले थे , गांध...