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Showing posts from August, 2020

History ka paper ( इतिहास का पर्चा)

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 एक कहावत तो आप सभी ने सुनी होगी " हिस्ट्री जियोग्राफी बड़ी बेवफ़ा रात को रटो सुबह सफा ।" बस ये कहावत मेरी ज़िन्दगी में सच हो गई और फिर क्या हुआ आयिए आप खुद ही देख लीजिए 👇👇 इतिहास परीक्षा थी उस दिन , चिन्ता से हृदय धड़कता था । थे बुरे शगुन घर से चलते ही , बांया हाथ फड़क्ता था । मैने सवाल जो याद किए , वे केवल आधे  याद हुए । उनमें से भी कुछ स्कूल तलक , आते -आते बर्बाद हुए । तुम २० मिनट हो लेट , द्वार पर चपरासी ने बतलाया । मैं मेल ट्रेन की तरह दौड़ता , कमरे के भीतर आया । पर्चा हाथो में पकड़ लिया , आंख मूंद टूक झूम गया । ओ ! प्रश्न पत्र लिखने वाले , ये पर्चा है या एटम बोम ? तूने पूछे वे ही सवाल , जो - जो थे मैने रटे नहीं । फिर आंख मूंद कर बैठ गया , बोला भगवान दया कर दे  मेरे दिमाग में इन प्रश्नों के , उत्तर  ठूंस ठूंस भर दे । गीता कहती है कर्म करो , फल की चिन्ता मत किया करो । मन में आए जो बात उसी को  पर्चे पर लिख दिया करो । मैने लिखा - पानी पत का दूसरा युद्ध हुआ था सावन में , जापान - जर्मनी बीच हुआ १८७५ में । लिख दिया महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी के चेले थे , गांध...

भारत मां की वेदना

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 बहुत सी खबरें आती हैं और चली जाती हैं । पर कुछ खबरें मुद्दे और चर्चा का विषय बन जाती हैं , आज एक दोस्त के साथ ऐसे ही कुछ खबरों पर चर्चा करते हुए बहुत से ख्याल मन में आने लगें क्या? ये वही सपनों का भारत है जिसकी परिकल्पना हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने की थी , या ऐसा कुछ है जो भारत माता हमसे कहना चाहती है और हम सुन नहीं पा रहे हैं। भारत माता की ऐसी ही कुछ वेदनाएं है जो मुझे महसूस हुई हैं- इन्हें पढ़ने के बाद शायद आप भी महसूस कर सकें बहुत कुछ है जो बेशक अभी भी बदलना बाकी है और हम सब को मिल कर बदलना पड़ेगा । भारत माता कहती हैं- मैं जकड़ गई हूं फिर ज़ंजीरों में आज  पहले जो जंजीरे थी वो गोरो ने डालीं आज की जो जंजीरे है वो अपनो ने डालीं मैं जकड़ गई हूं फिर ज़ंजीरों में आज भावों से खोखले होकर तुम जब तिरंगा लहराते हो  खुशी नहीं मिलती मुझे नस्तर सा चुभता है  कहीं भ्रष्टाचार के मंजर , तो कहीं आतंकवाद के खंजर कहीं नक्सलवाद के खंजर तो,कहीं नेताओं में बंदरबांट के मंजर भ्रष्टाचार के दंशो से छलनी हुई आत्मा मेरी  खोखला हुआ शरीर छलछलाती आंखें भर भर लेती नीर  कौन हुआ है लाल ...

भगत सिंह

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प्रस्तावना : भगत सिंह  भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी थे। चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इन्होंने देश की आज़ादी के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया। पहले लाहौर में साण्डर्स की हत्या और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की। इन्होंने असेम्बली में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। जिसके फलस्वरूप इन्हें २३ मार्च १९३१ को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया।    जन्म : भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है।उनके पिता का नाम सरदार किशन सिंह संधू और माता का नाम विद्यावती कौर था।   उस समय  उनके चाचा अजीत सिंह और श्‍वान सिंह भारत की आजादी में अपना सहयोग दे रहे थे। ये दोनों करतार सिंह सराभा द्वारा संचालित गदर पाटी के सदस्‍य थे। भगत सिंह पर इन दोनों का गहरा प्रभाव पड़ा था। इसलिए ये बचपन से ही अंग्रेजों से घृणा करने लगे ...