भारत मां की वेदना
बहुत सी खबरें आती हैं और चली जाती हैं । पर कुछ खबरें मुद्दे और चर्चा का विषय बन जाती हैं , आज एक दोस्त के साथ ऐसे ही कुछ खबरों पर चर्चा करते हुए बहुत से ख्याल मन में आने लगें क्या? ये वही सपनों का भारत है जिसकी परिकल्पना हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने की थी , या ऐसा कुछ है जो भारत माता हमसे कहना चाहती है और हम सुन नहीं पा रहे हैं।
भारत माता की ऐसी ही कुछ वेदनाएं है जो मुझे महसूस हुई हैं-
इन्हें पढ़ने के बाद शायद आप भी महसूस कर सकें बहुत कुछ है जो बेशक अभी भी बदलना बाकी है और हम सब को मिल कर बदलना पड़ेगा ।
भारत माता कहती हैं-
मैं जकड़ गई हूं फिर ज़ंजीरों में आज
पहले जो जंजीरे थी वो गोरो ने डालीं
आज की जो जंजीरे है वो अपनो ने डालीं
मैं जकड़ गई हूं फिर ज़ंजीरों में आज
भावों से खोखले होकर तुम जब तिरंगा लहराते हो
खुशी नहीं मिलती मुझे नस्तर सा चुभता है
कहीं भ्रष्टाचार के मंजर , तो कहीं आतंकवाद के खंजर
कहीं नक्सलवाद के खंजर तो,कहीं नेताओं में बंदरबांट के मंजर
भ्रष्टाचार के दंशो से छलनी हुई आत्मा मेरी
खोखला हुआ शरीर छलछलाती आंखें भर भर लेती नीर
कौन हुआ है लाल मेरा ऐसा जो हर ले मेरी पीर ।।
खून से लथपथ खड़ी है मां भारती,
सैकड़ों खंजरों के घाव सीने पे लिए मां भारती ,
वेदनामयी करुण स्वर में विलाप करती मां भारती,
मुझे खून से लथपथ किया है मेरे अपने कहलाने वाले भारतीयों ने ,
देश भक्ति और भारतीयता का झूठा दम भरने वालों,
देश सेवा के नाम पे अपना घर भरने वालों सत्ता के सिकंदरो ,
एक बार तो गिरेबा में झांक के देखो कि कितने घाव दिए है अपनी मां को ,
कभी भ्रष्टाचार के खंजर तो कभी देश सेवा के दिखावे और छलावे के मंजर ,
तो कभी किसी मुद्दे को उछाल कर अपनी -अपनी रोटी सेंकने के मंजर ,
अखण्ड भारत की चाह रखने वाले चाणक्य को भय था महज एक सिकंदर से कि लूट ना ले कहीं भारत को
हम अपना दर्द क्या वन्या करें !यहां तो हर सत्ताई शक्स सिकंदर बना बैठा है।
~(मां की कलम से)
Tread carefully

Wow it is just very amazing 👌👌and the lines are really touching 👍👍😘
ReplyDeleteTrueeee 👌👌
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