किस्से...

किस्से


यूं तो किस्से हम सभी के पास होते है कुछ अच्छे, कुछ बुरे और कुछ ऐसे जिन्हें याद करके कई सालों बाद भी हम ठहाके मार के हंस सकते है । ऐसे जिनमें हमारा बचपना होता है और हम बस पुराने दिनों में खो जाते है ।


बात होगी २०१७ की , नवंबर का महीना होगा । मौसम में ठंड का दौर और कॉलेज में असाइनमेंट का दौर शुरू हो चुका था ।

एक दिन मै और मेरी दोस्त  दोनों देर रात तक असाइनमेंट बना रहे थे और मेरा बिल्कुल मन नहीं लग रहा था मेरे दिमाग में बस शरारतें आ रही थी । मैंने दोस्त से कहा चल हॉस्टल में किसी को परेशान करते है , शोर मचा कर भाग आते है २nd फ्लोर से , या फ्रिज में से सामान गायब कर देते है । पर मेरी दोस्त वो थोड़ी शांत थी उसे शरारतें उतनी पसंद नहीं  थी तो थोड़ी देर बाद हमने कमरे की लाइट बंद की और सोने लगे , वो सो गई पर मै लेटे - लेटे कुछ तूफानी करने का सोचने लगी ।

 इतने में मैने देखा कमरे की खिड़की से हल्की हल्की रोशनी मेरी दोस्त के पलंग में आ रही थी और पास में ही टेबल पे चाकू पड़ा था , मेरी आंखो में जैसे चमक सी आ गई मैने फौरन अपने बाल खोले और चाकू हाथ में लेकर उसके उपर बैठ गई अब वो हल्की हल्की रोशनी मेरे उपर पड़ रही थी और शायद में इतनी भयानक लग रही थी कि यदि मै खुद को देख लेती तो २ दिन बिस्तर से नहीं उठ पाती । मुझे देख मेरी दोस्त इतनी ज़ोर से चिलाई की सामने वाली मल्टी के लोग भी बाहर आ गए ।

आज भी जब ये किस्सा याद आता है हम दोनों बस कॉलेज के दिनों में खो जाते है .....


Tread carefully........




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